धरती आबा बिरसा मुंडा जयंती
आज १५ नोव्हेबर याने धरती आबा बिरसा मुंडा जयती उनका जन्म १८७५ मे हुवा था और उनकी म्रुत्यू ९ जुन १९०० मे हुई | इस आदिवासी महानायक के बारे मे बोहत कुछ कहा जा सकता है क्युकि उन्होंने अपनी २५ वर्ष कि उमर मे आदिवासी के जल,जंगल,जमिन अग्रेंज और सावकारो के बढ़ते लगान और लगान न देने खिलाप हुकुमत कि जंग छिडी थि और उलगुलान जन आंदोलन किया था |
इस आंदोलन मे कई आदिवासी जनसमुदाय ने अपने प्राण गवाए और शहिद हुए | बिरसा मुंडा के बढ़ते आंदोलन अग्रेंजो के खिलाफ विद्रोह के वजह से अग्रेज भयभित हुए इस कारण बिरसा मुंडा कि गिरप्तारी के लिए ५००रुपए का इनाम रखा इस वजह से किसीने पैसो लालच मे आकर बिरसा मुंडा का पता बताकर गिरप्तार करवाया गया | और उन्हे जेल मे रखा गया उन्हे धोकादडी से धिमेधिमे खाने मे जहर देकर मार दिया गया और बताया गया कि बिरसा मुंडा कि हेजा कि बिमारी से उनकी म्रुत्यु हुई | फिर भि उनका आंदोलन नही रुका पुरे भारतवर्ष मे यह आंदोलन चला |
आज भि भगवान बिरसा मुंडा हर आदिवासी के दिलोमे जिंदा है | बिरसा मुंडा के वजह से आदिवासी के जल,जंगल,जमिन,हक्क और अधिकार मिले और जो अंग्रेज, सावकार आदिवासी कि जमिन छिन रहे थे उसपर रोक लगा दिया आज भि आदिवासी के जमिन पर सिर्फ मालिकाना हक्क अधिकार आदिवासी का हि रहेगा किसी गैर आदिवासी का नही | बिरसा मुंडा का कि विचारधारा और उनका सपना आज भि अधुरा है उन्होंने कहा था मेरे गांव मे मेरा राज याने हर आदिवासी क्षेत्र मे सिर्फ आदिवासी का राज रहेगा इसपर किसीका राज नही रहेंगा लेकिन यह आज भि पुरा नही हुवा क्युकि आज आदिवासी जनसमुदाय को आदिवासी का इतिहास पता नही शिक्षित हो या अनपढ , और आदिवासी जाती,धर्म,राजनैतिक मे फसा है इस वजह से आदिवासी के खिलाप सिर्फ आदिवासी हि खडा होता है जैसे कि राजनिती मे जो आदिवासी नेता खडा होता है वह सिर्फ उसके फायदा करने के निए खड़ा होता है इसमे जो आदिवासी जनसमुदाय पक्षभेद मे एक दुसरो के दुश्मन बने जा रहे है और झगडा इसका फायदा दुसरा आदिवासी क्षेत्र मे गैर आदिवासी ले रहा है | धर्मपरिवर्तन आदिवासी का धर्म हि आदिवासी है लेकिन समाज मे धर्म का धंदा खोल रखा है इसमे कई आदिवासी भि शामिल है जो धर्मपरिवर्तन के लिए लोंगो को उपसा रहे है | और शिक्षित युवा वर्ग कि तो बात बोहत अलग है जो सिर्फ अपने किताबो का ग्यान ले रहे है लेकिन उन्हे आदिवासी का इतिहास पता नही है इसका कारण सिर्फ आदिवासी का इतिहास आज भि किसी किताबो मे किसी लेखको ने लिखा नही | इसका परिणाम आज हमे मिल रहा है और जो अनपढ लोग है उन्हे कुछ पता नही क्युकी उनमे जनजाग्रुती नही है कई जो पढ़े लिखे लोग है उनको आदिवासी का इतिहास पता है सिर्फ अपने लिए हि रखते है इस वजह से हमारा इतिहास पता नही है लेकिन बोहत से जनसंघटन है जो आदिवासी हक्क और अधिकारी,आदिवासी का इतिहास समाज जनजाग्रुती का काम कर रहे है इसके वजह से धिरे धिरे हमारा आदिवासी समाज जाग्रुत हो रहा है | लेकिन इसमे भि कई गैर आदिवासी मनुवादि विचारधारा वाले आदिवासी को हिंदु,और वनवासी कह रहै वह सिर्फ आदिवासी का गलत इतिहास बता रहे है आदिवासी इस देश का मुलमालिक है यह उन्हे भि पता है और आदिवासी प्रक्रुती पुजक है | आज बिरसा मुंडा जयंती है उन्होंने भारत वर्ष मे गौरव दिवस मनाने का प्रयास कर रहे है यह बात बोहत अलग है उनको डर है कि आदिवासी जनगनणा के अनुसार आदिवासी धर्म कॉलम मे सिर्फ आदिवासी हि शब्द लिखा गया तो उनका राज खतम होंगा | आज सभि आदिवासी जनसमुदाय ,जनसंघटन को एकता मे आकर आदिवासी सरकार याने भगवान बिरसा मुंडा के सपनो को पुरा करने का प्रयास करे |
मेरे गांव मे मेरा राज
जंगल राज
आदिवासी सरकार
🙏बिरसा मुंडा जयती के अवसर पर विनंम्र अभिवादन 🙏